Wednesday, April 24, 2024

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nationalism

“जिद” और चरित्र में अकड़ आवश्यक है

जिद्दीपन है ना जब सकारात्मक हो समाजिकता से ओत प्रोत हो, नैतिकता से परिपूर्ण हो और राष्ट्रवाद की भावना के रस से सराबोर हो तो कभी सावरकर, कभी भगत, कभी नेताजी, कभी आज़ाद, कभी बिस्मिल, कभी लाल बाल और पाल तो कभी सरदार, कभी मुखर्जी, कभी उपाध्याय, कभी शास्त्री, कभी अटल, कभी आडवाणी तो कभी नरेंद्र दामोदर दास मोदी बनकर समस्त विश्व को प्रभावित कर देता है और अपने रंग में रंग देता है।

How RSS has saved insurgent Nagaland

It is an easy task to infiltrate fear in the mind of minorities; but it is really tough to eradicate it- a feat RSS has achieved in Nagaland

Tagore’s tryst with destiny of India: Beyond secularism

National anthems have been an important component of identity in the era of Westphalian sovereignty.

Standing during the national anthem when no one is watching is nationalism

Recently two Kolkata girls mocked the national anthem while smoking.

An open letter to my lords in supreme court

We are increasingly worried about the impression that the Supreme court is giving to us about total lack of awareness about the various subversive forces that are operating in the country and their modus operandi.

Just a Bhakt’s Dream!

Narendra Modi is a megalomaniac and a facist!

अग्निपथ योजना: एक स्वर्णिम युवा भविष्य और शसक्त देश

१७से २१ वर्ष के युवाओं के उत्साह, उमंग और शारीरिक व मानसिक मजबूती का उपयोग देश को सुरक्षित रखने में किया जा सकेगा। गरीब से गरीब तबके के युवा इस योजना के अंतर्गत अपने भविष्य को शसक्त और सुदृढ़ बना सकते हैं। देश कि सेना तकनिकी का विशेष उपयोग कर सकती है।

How the Hindu youth’s failure to retain their religious identity is contributing to increased Hinduphobia

indu youth has not been successful in retaining their identity. And probably that’s one of those many reasons why Hinduphobic behavior has now-a-days become a growing concern.

राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादी क्यों जरूरी है?

यूक्रेन कि जनता भौतिक सुख सुविधाओं का भोग करने कि इतनी आदत हो चुकी है, कि उनके लिए ना तो राष्ट्र का कोई मतलब है और ना राष्ट्रवाद से कोई लेना देना। उन्हें इस बात की परवाह हि नहीं रही की युक्रेन उनका अपना देश है वो केवल इसे मिट्टी का एक टुकड़ा भर समझते रहे।

हमारा गांव

यूं गांव हमारा सुन्दर है, कुछ लोग यहाँ के बिगड़े है, जयचन्द उन्हें तो प्यारे हैं, आजाद-भगत मर जाते हैं।

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