Monday, March 1, 2021

Opinions

Pseudo heroes of hypocrisy – Real destroyers of democracy

There appears to be an agenda to malign image of India and destabilize the democratically elected government. They will take up one non-issue at a time and systematically organize fake protests.

Explained: Why govt is not concerned about rising fuel prices in India

In recent Union budget of 2020-21 everyone expected Central Government would impose tax on Middle Class to generate revenue but it turns out that Government didn't impose tax. As of now Government is in need for Money and that money is now being generated from tax on Petrol and Diesel.

Life after marriage- For HIM?

There appears to be an agenda to malign image of India and destabilize the democratically elected government. They will take up one non-issue at a time and systematically organize fake protests.

शिवाजी और उनका लोकाभिमुख शासन-तंत्र

शिवाजी महाराज की शासन-व्यवस्था लोकाभिमुख थी। वे एक निरंकुश शासक की बजाय लोककल्याणकारी शासक के रूप में हमारे सामने आते हैं। ए

समय एवं समाज की चेतना को झंकृत करने वाले- छत्रपति शिवाजी

शिवाजी का उदय केवल एक व्यक्ति का उदय मात्र नहीं था, बल्कि वह जातियों के उत्साह और पुरुषार्थ का उदय था, गौरव और स्वाभिमान का उदय था, स्वराज, सुराज, स्वधर्म व सुशासन का उदय था और इन सबसे अधिक वह आदर्श राजा के जीवंत और मूर्त्तिमान प्रेरणा-पुरुष का उदय था।

India’s fascination with ‘Bhaands’

In order to look cool and woke, Indians will rally behind their Bhaand of choice and amplify whatever dumb idea or ideology makes them "cool".

संघ विचार-परिवार के वैचारिक अधिष्ठान की नींव- श्री गुरूजी

संघ विचार-परिवार जिस सुदृढ़ वैचारिक अधिष्ठान पर खड़ा है उसके मूल में माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी के विचार ही बीज रूप में विद्यमान हैं। संघ का स्थूल-शरीरिक ढाँचा यदि डॉक्टर हेडगेवार की देन है तो उसकी आत्मा उसके द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरूजी के द्वारा रची-गढ़ी गई है।

Smashing the false narrative on India’s Hindu movement

There is a narrative being pushed by ‘intellectuals’ in India that Modi and the Hindu movement in general pose a threat to this fundamental pillar of India’s Democracy. That narrative is laughable and deeply flawed.

शिवाजी महाराज मतलब अदम्य साहस, महिला सम्मान और गुरिल्ला वारफेयर के उस्तादों के उस्ताद

छत्रपति शिवाजी महाराज अप्रतिम योद्धा, कुशल रणनीतिकार और सामाजिक रूप से वसुधैव कुटुंबकम के प्रणेता थे। उनकी महान सोच और उनकी दूरदृष्टि ने मराठा साम्राज्य की नींव डाली जिसने संख्या में कम होने के बाद भी दक्कन में निज़ाम और उत्तर में मुगलों को लालकिले ही हद तक सीमित कर दिया था।

The malaise that is ailing our country

If 1000 years of invasions, loot, plunder and occupations could not kill the humanity of this great nation, can one person sitting in the chair of the Prime Minister kill it? Are we as a nation so bereft of morality?

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