Sunday, September 25, 2022
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prashantchauhan

मैं प्रशांत, उप्र से हूँ. पापा की जॉब के कारण बचपन लगभग पूरे उप्र मे बीता. आईआईटी रूड़की और देल्ही से मास्टर्स और पीएचडी करने के बाद ३ साल आईएसटी लिज़्बन मे न्यूक्लियर फ्यूजन के फील्ड मे काम किया | और अब २०१२ से एनसीआर में एक यूनिवर्सिटी फैकल्टी हूँ,, हिन्दी कविता और उर्दू शायरी पड़ना और सुनना अच्छा लगता है और कभी-कभी अपने ख़्यालो को अपनी अधकचरी समझ के अनुसार शब्दों के रूप मे लिखने की कोशिश कर करता हूँ ...

लिंचिंग लिंचिंग में फरक..

लिंचिंग लिंचिंग में भी फरक होता है साहेब,, एक इन्टॉलरेंट लिंचिंग है, तो दूसरी केवल ग़लतफ़हमी.

मैं और तथाकथित सेकुलरिज्म

मोदी हेटिंग में इतने अंधे हो चुके हैं की ना अपना भला दिख रहा है ना देश का. और अगर ये इनका सेकुलरिज्म है, तो ये सेक्युलरसिम इन्हे मुबारक.

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