Thursday, May 23, 2024
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Abhishek Singh

Columnist : Politics. National Issues. Public Policies.

जातिगत जनगणना या सरकारी नौकरी, वोट बैंक और सुविधाओं का बंदर बाँट?

साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जातीय जनगणना का मकसद केवल ये साबित करना है कि पिछड़ी जातियों की संख्या ज्यादा है और उनकी संख्या के मुताबिक ही सरकारी नौकरियों, शिक्षण संस्थानों में उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

मजबूत सरकार का मजबूत मत्रिमंडल

सरकार मजबूत भी होती है और मजबूर भी होती है।मोदी 2.0 के मत्रिमंडल में हुए बड़े फेरबदल को मजबूत सरकार के प्रतीकात्मक रूप में...

जातिगत आधार पर कुख्यात अपराधी विकास दुबे की पैरवी करने वाले लोगों को कुछ तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए

आप जिसे अपना ब्राह्मण भाई समझ कर शेर बता रहे हैं या उसके अपराधी बनने के पीछे सिस्टम को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, आपके उसी शेर विकास दुबे ने जितनी हत्याएं अब तक की है उनमें से 80% ब्राह्मण ही हैं।

जनरल जीडी बक्शी के गुस्से ने वामियों को ट्विटर पर चूड़ियां तुड़वा दीं

राष्ट्रीय न्यूज चैनल "रिपब्लिक भारत" पर एक डिबेट शो के दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बक्शी ने एक पैनलिस्ट को गाली दे दी तो पूरे लिबरल समाज ने ट्विटर पर चूड़ियां तोड़ना शुरू कर दिया।राष्ट्रीय न्यूज चैनल "रिपब्लिक भारत" पर एक डिबेट शो के दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बक्शी ने एक पैनलिस्ट को गाली दे दी तो पूरे लिबरल समाज ने ट्विटर पर चूड़ियां तोड़ना शुरू कर दिया।

“वीरता ही शांति की पूर्व शर्त होती है, निर्बल कभी शांति स्थापित नहीं कर पाते”

प्रधानमंत्री ने कहा "शांति कभी निर्बलों द्वारा स्थापित नहीं की जा सकती" अर्थात् शांति स्थापित करने का कार्य वीरों का है। जिसके लिए उन्हें अधर्म/अराजकता/शत्रु का विनाश करना पड़ता है। हिंसा के विरुद्ध भयावह प्रतिहिंसा करनी ही पड़ती है।

बदलते भारत की तस्वीर गढ़ते मोदी

पिछ्ले वर्ष दिल्ली में हुए रायसीना डायलॉग में भारत के विदेश सचिव ने कहा था कि “भारत गुटनिरपेक्षता की नीतियों से बाहर निकल चुका है और अपने हितों को देखते हुए अन्य देशों के साथ रिश्ते बना रहा है".

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