Saturday, April 20, 2024

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Lies of Ravish Kumar

Shameless Ravish Kumar’s Prime Time on inflation

During, Modi govt's 1st term, Journalists like Ravish Kumar were at least pretending to be neutral and were making efforts to cover up their misdemeanors; were furthering their agendas discreetly. Now, they have got the audacity to showcase their biased journalism without any shame, they do it right in your face, staring in your eyes and if you blink.

आरोग्य सेतू एप पर रवीश की प्राइम टाइम (व्यंग्य)

जहां देश कोरोना के संकट से जूझ रहा था, मजदूर भूख से तड़प रहे थे, दिहाड़ी मजदूर दूसरे प्रदेशों में फंसे होने के कारण आत्महत्या करने को विवश थे और प्रधानमंत्री मंत्री लोगो को अपने मोबाइल में app install करने को विवश कर रहे थे। क्या यही लोकतंत्र है..??

अदना सा पत्रकार: हें हें हें

शाम आठ बजे और कुछ टीआरपी जैसे समाजवादी कारणों से अब नौ बजे, प्राइमटाइम में अधोमुखी मेरूरज्जु से निहुरा हुआ एक अदना सा पत्रकार...

Why Ravish Kumar is more dangerous than other contemporary news anchors

Anchors like Ravish Kumar who declare themselves neutral and inert to any political influence are the most dangerous ones because they can camouflage their political narratives as news by decorating it with false but sensational information, relatable characters and conventional ‘Governments don’t care about poor’ sentiments.

रवीश जेल क्यूँ जाना चाहते हैं?

रवीश का प्राइम टाइम के दर्शक एकदम मूर्ख होते हैं. वो प्राइमटाइम पहले टीवी पर देखते हैं. फिर यूट्यूब पर इसके बावजूद, जब भी किसी भक्त से भिडंत होती है तो हर बार उन्हें धोबिया पछाड़ का सामना करना पड़ता है.

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