Wednesday, September 28, 2022

Hindi

भीड़ का मिज़ाज

हरयाणा मे आरक्षण की माँग को लेके तोड़ फोड़ हुई तो उसी की आड़ मे बलात्कार भी। जवाबदेही किसी की नही है क्यूंकी ये भीड़ ने किया!

अर्नब के साथ राजदीप और बरखा भले न हों, देश उनके साथ है, और उसकी एक वजह है

अर्नब के साथ देश खड़ा है, और उसकी वजह से राजदीप और बरखा को तकलीफ़ हो रही है।

जेएनयू के छात्रों को आत्मविश्लेषण करना चाहिए

जेएनयू के छात्रों के नाम एक खुला पत्र

रवीश कुमार के कारनामें, जो उन्होंने स्टूडियो में अंधेरा कर के किया

टीवी पर अंधेरा कर के रवीश ने वही सब किया जो उन्होनें दूसरों पर करने का आरोप लगाया

भारत के मुख्य न्यायाधीश के नाम एक खुला पत्र – कृप्या जेएनयू मामले में दख़ल करें

माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय क्या जेएनयू में लगाए गए नारे माननीय न्यायालय की अवमानना नहीं है?

रविश कुमार की मार्मिक एवं कालात्मक विडियो का जवाब

रविश कुमार जी, ये अँधेरा अगर मीडिया का, पत्रकारिता का तस्वीर है, तो जनाब आपका चैनल इस अँधेरे का तमराज किल्विस है।

टीवी अंधेरा कर रवीश ने सवाल सही उठाए, पर जवाब कौन देगा?

मीडिया को टीबी हो गया है या रवीश के मुताबिक टीवी को टीबी हो गया है, पर मीडिया को बीमार करने के लिए ज़िम्मेदार कौन है ?

रवीश कुमार के नाम एक खुला पत्र – टीवी परदे पर पड़ा काला परदा दरअसल आपके ज़मीर पर पड़ा था

आपने देशद्रोह जैसे जघन्य अपराध को गरीबी, मासूम छात्र और अल्पसंख्यक जैसे मामलों में उलझा दिया. ये अन्याय था.

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