Thursday, April 22, 2021
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saurabhshah

मीडिया की निगेटिविटी से बचने के लिए तीन मई तक आंख-कान ढंकना भी ज़रूरी है

अखबार-पत्रिकाएं भले ही अभी बंद हों लेकिन उसमें शोर मचानेवाले चुप नहीं हैं. वे सोशल मीडिया में जाकर चिल्ला रहे हैं कि लॉकडाउन की अवधि बढने से देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड रहा है, गरीबों-किसानों-दिहाडी मजदूरों के सिर पर आसमान टूट पडा है.

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