Thursday, April 22, 2021
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pulkitnpc

इस्लामोफ़ोबिया का झूठ और घरवापसी

एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में अदालत द्वारा आरकियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) जैसे वैज्ञानिक संस्थानों के पेश किए गए सबूतों एवं तथ्यों के आधार पर एक स्थान को उसी राष्ट्र की सबसे बड़ी आबादी द्वारा पूजा जाने वाले देवता का जन्म स्थान घोषित करना किस तरह विदेशी आक्रांताओं द्वारा एक चर्च को मस्जिद में तब्दील कर देने से भिन्न है।

अस्थिर और बौखलाए पाकिस्तान का विधुर विलाप

बीते सप्ताह पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी एवं आईएसपीआर के डायरेक्टर जनरल बाबर इफ्तिखार ने एक प्रेस वार्ता के दौरान भारत पर तंज कसते हुए यह आरोप लगाया के भारत, पाकिस्तान को अस्थिर करने की मंशा रखने के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। यह वैसा ही है जैसा फिल्म वेलकम में उदय भाई का कहना कि मजनूं उनकी एक्टिंग स्किल्स से जलता है।

जो भविष्य में तख्त़ और SOTY-3 को 100 करोड़ की opening दिलाएंगे, उनके लिए जल में रहकर मगरों से बैर पाल रही है...

आज के पूंजीवादी समाज में केवल सराहना कर देना मात्र उपाय नहीं है, वित्तीय तौर पर सहयोग अति आवश्यक है।अलग-अलग किस्म के विज्ञापन, प्रचार या समीक्षाओं से सम्मोहित न होकर अपने दिमाग एवं दिल का इस्तेमाल करते हुए किसी भी कला को पहचानना और उसके आधार पर ही उसे सराहना या आर्थिक सहयोग प्रदान करना ही हमारी शैली होनी चाहिए।

AMU की पाक ज़मीं से उपजा भारत के Secularism का रखवाला निर्देशक

अगर अनुभव सिन्हा एक एजेंडा से भरे निर्देशक नहीं बल्कि सचमुच दलितों के पक्ष कार एवं भला चाहने वाले व्यक्ति हैं तो क्या वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जिसके वह alumni रहे हैं में दलित आरक्षण के मुद्दे को उठाएंगे? क्या देश के अन्य विश्वविद्यालयों की तरह एएमयू जैसे विश्वविद्यालय में भी दलितों को आरक्षण का अधिकार नहीं?

Cinema-Filmmaking-Art-भारी शब्दों का प्रयोग करके अपनी धूर्तता छिपाती हल्की हिंदी फिल्म इंडस्ट्री

वर्षों की गुलामी के कारण हमारी मनोस्थिति ही ऐसी हो गयी है कि मनोरंजन की डिश में भी जब तक पश्चिमी तड़का न लगे वह हमें स्वाद नहीं देती या यूं कहें कि ये डिश बनाने वाले बावर्ची हमारी स्वाद कलिकाओं को विकसित ही नहीं होने देना चाहते ताकि अपने घटिया व्यंजन परोसते रहें और हम उन्हें ही मालपूआ समझ कर ग्रहण करते रहें।

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