Friday, April 23, 2021
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भरत का भारत

मैं भारत माँ का सामान्य पुत्र हूँ ,भारतीय वैदिक सभ्यता मेरी जीव आत्मा व् संसार में हिँदू कहे जाने बाले आर्य मेरे पूर्वज हैं ॐ "सनातन धर्म जयते यथा "

कश्मीर-धर्मांन्ध्ता व सेक्युलर इंडिया

अनुच्छेद ३५ ए व धारा ३७० असंविधानिक व भूतकाल में स्वार्थपिपाषा से पूर्ण सत्तारूपी यश व विश्वशांति के नोबेल पुरस्कार की आकांक्षा का एक राष्ट्र विरोधी व घृणित अलोकतांत्रिक पक्ष था जिसे वर्तमान देशभक्त संवैधानिक लोकतांत्रिक निस्वार्थ सरकार ने निष्काम भाव से विपक्षित किया।

हॉकी का जादूगर राष्ट्रप्रेम से राष्ट्रीयखेल तक! भारत रत्न एक खोज?

भारत मां के वीर निष्कामी खेल-समर्पित रत्न मेजर ध्यानचंद को कौन सी सरकार कब कैसे क्यों भारत रत्न देगी या नहीं यह विषय उपयुक्त नहीं है, राष्ट्रीय वलिदेवी पर अत्याधिक वीर क्रांतिकारियों को क्या भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है?

गौरक्षक गोपाल- हत्या या बलिदान? और कितने गोपालों की आहुतिओं के उपरांत जागोगे! १३५० वर्षों से वेदिकाएँ ज्वलित हैं!

1947 से 1970 तक चलें गौ अन्दोंलनों के बारे में ना कहीं चर्चा हुई ना ही कभी यह मुद्दा राष्ट्रीय मंच तक अपनी उपस्तिथि दर्ज करा पाया।

हिंदुत्व भावनाओं का अधिपतन -क्या यह प्रारब्ध है या निजकर्म

हज़ारो वर्षो से वैदिक सभ्यता,भारतीयता का जो उपहास व निम्नस्तरीयता का जो भाव विदेशी आक्रांताओ द्धारा प्रचलित रहा है वो आज भी जीवित है, तर्क, आलोचना, टिप्पड़ियाँ, कुंठा से ना हमारा भूतकाल पुनः राम राज्य बन जायेगा ना ही हम भारतियों की व्यथा को शांत कर पायेगा।

गौ माता -हिंन्दुओ के दृष्टिकोण से भाग १

इस्लामिक, वामपंथी, क्रिसियन व अधार्मिक विचारों की बात ना कर उन चेतन भ्रांन्तिक सनातन हिंन्दुओ की चर्चा करेंगे, जो मुख्यता गौवंश के पतन के लिए मुख्यता जिम्मेदार हैं।

भारत का सेक्युलरिज्म- इस्लामिक सेक्युलरिज्म

जीसस के जन्म से भी पूर्व महान राष्ट्रप्रेमी विद्वान पंडित चाणक्य द्वारा कही हुई यह बात "अखंड भारत" आज स्वयं में ही अकल्पनीय  शब्दावली बन चुकी है.

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