Tuesday, October 20, 2020
2 Articles by

D. Sathyanarayanan

This is why communists are against Aadhar

Introduction of Aadhar is becoming a great obstacle for Marxists as this will open up the sources of their 'funding'.

How so-called liberals are no better than trolls

Freedom of Expression is a two-way street; it is not the property of pampered brats in English media.

Latest News

शांत कश्मीर और चिदंबरम का 370 वाला तीर

डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के सबसे शक्तिशाली मंत्रियो में से एक चिदंबरम आज वही भाषा बोल रहे है जो पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर बोलता आया है। चिदंबरम यही नहीं रुके उन्होंने अलगाववादियों को भी महत्व देने की बात कही है।

मिले न मिले हम- स्टारिंग चिराग पासवान

आज के परिपेक्ष्य में बिहार का चुनाव कई मायनो में अलग है। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पारम्परिक राजनीती वाली रणनीति का अनुसरण कर रहे है तो वही युवा चिराग और तेजस्वी विरासती जनाधार को नए भविष्य का सपना दिखने का प्रयास कर रहे है।

How BJP can win seats in Tamil Nadu and Kerala

It is time for BJP to eye on Tamil Nadu and Kerala. In Lok Sabha election 2024 BJP will win ±15 seats in TN and ±3 seats in Kerala.

Brace for ad Jihad

Delusionary fairy tale

Why this hullabaloo about shifting Bollywood?

Let the new film city emerge as the genuine centre for producing high quality films that are genuinely Indian and be helpful in building a strong value-based society.

Recently Popular

Jallikattu – the popular sentiment & ‘The Kiss of Judas Bull’ incident

A contrarian view on the issue being hotly debated.

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

Twitter wrongfully reports Jammu & Kashmir’s location again

In February of this year Twitter was accused of getting Jammu & Kashmir’s location wrong.

How I was saved from Love Jihad

A personal experience of a liberal urban woman and her close brush with Islam.

हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना कहां तक उचित है??

विज्ञापन में दिखाए गए पात्रों के धर्म एक दूसरे से बदल दिए जाएं तो क्या देश में अभी शांति रहती। क्या तनिष्क के शोरूम सुरक्षित रहते। क्या लिबरल तब भी अभिभ्यक्ती की स्वतन्त्रता की बात करते।