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अभिव्यक्ति

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अभिव्यक्ति

2014 से लगातार समय समय पर मौजूदा सरकार पर आरोप लगते रहे हैं की ये सरकार लोगों से बोलने का हक छीन रही है। सीर्फ इतना हीं नहीं हर संवैधानिक संस्थानों का चरित्र हनन किया जा रहा है। Supreme Court, Police, Army, CBI.. सारे संस्थानों के सम्प्रभुता पर योजनाबद्ध तरीके से सवाल खङे किए जा रहे हैं।

जब-जब काम कुछ खास लोगों के मन मुताबिक नहीं हुआ इन लोगों ने संस्थानों को हीं कटघरे में खङा कर दिया। मीडिया भी इस चीज से अछूता नहीं रहा है। मीडिया में भी एक वर्ग ने खुद को इमानदार और बाकी को नए नए(गोदी मीडिया)शब्दों का प्रयोग कर के उनकी पत्रकारीता पर हीं सवाल करते हैं।

इस मुद्दे पर बोलना इसलिए आवश्यक है क्योंकि इससे लोगों के मन में संस्थाओं के प्रती गलत छवि बन रही है।और ये किसी भी देश के लिए सही नहीं है।क्योंकि सरकारें समय समय पर बदलती रहती है परंतु ये संस्थाऐं हमेंशा रहेंगी। अगर जनता के मन में एक बार गलत भावना बैठ गइ तो सरकार किसी की भी हो उनके लिए मुश्किलें खङा कर सकती है।

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