EVM हैक – सत्य या प्रोपगैंडा

यदि कोई कहे कि ईवीएम मशीन को हैक नहीं किया जा सकता है तो आप बिना किसी हिचकिचाहट के उसे एक कंटाप धर दीजिए (मैं यहां किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करता हूँ और गांधी का इतना बड़ा भक्त हूँ कि राह चलते उनकी तस्वीर सड़क पर गिरी मिल जाये तो उसे उठाकर, सबकी नजर से बचाकर जेब मे धर लेता हूं बशर्ते वो तस्वीर नोट पर छपी हो।)

जब पढ़े लिखे डॉक्टर, इंजीनियर और सीए लोगों का ब्रेन हैक करके उन्हें मजहब के नाम पर आतंकवादी बनाया जा सकता है तो मशीन तो मशीन ठहरी उसे तो मानव ने बनाया है और इसलिए उसे मानव बिल्कुल हैक कर सकता है।

तो क्या ईवीएम हैक हो सकती है? बिल्कुल हो सकती है।

चलिए अब जाने कि हैक होता कैसे है?

हॉलीवुड फिल्मों की तरह हैक दो मिनट के सिक्योरिटी ब्रेक में नहीं किया जा सकता है। नोलान अपनी फिल्मों में कुछ भी दिखाए लेकिन सत्य इसके विपरीत है। हैकिंग के लिए आपको उस एनवायरनमेंट नेटवर्क में जाना होता है जहां का सिस्टम हैक करना है। अच्छे से अच्छे हैकर को नेटवर्क में घुसने से लेकर हैक करने तक में पैतालीस से साठ दिन का समय लगता है और इस समय में वही सफलता पाते हैं जो इस फील्ड के स्टीवन स्पिलबर्ग हैं।

यदि हैकर आपके नेटवर्क में आकर कुछ भी चोरी करता है तो चाहे वो जानकरी हो या पैसा, देर सबेर इस बात का पता लग ही जाएगा क्योंकि हैकर कहीं ना कहीं कोई ना कोई क्लू  छोड़ जाएगा और यह तब जब इस प्रक्रिया में सिर्फ गिनती के लोग (एक से पांच आदमी) शामिल होते हैं और आपका नेटवर्क इंटरनेट से कनेक्ट होता है।

अब चलते हैं ईवीएम मशीन की तरफ। ईवीएम मशीन किसी एक सेंटर पॉइंट या इंटरनेट से जुड़ी हुई नहीं होती हैं। तो एनवायरनमेंट नेटवर्क में कहीं दूर से बैठकर एंट्री करना और हैक करना संभव नहीं है। ईवीएम मशीन को हैक करने के लिए आपको प्रत्येक मशीन को एक एक करके हैक करना होगा। जब इंटरनेट से सिस्टम नेटवर्क हैक करने में एक से पांच आदमी लगते हैं तो एक – एक ईवीएम मशीन को फिजिकली हैक करने में काफी लोग लगेंगे और जब लोग हैक में शामिल होंगे तो कहीं ना कहीं बात सामने आ जाएगी। जैसा अभी तक देखने को नहीं मिला है।

कुछ मशीनों को गुप्त रूप से हैक कर भी लिया जाए तो उससे लोकसभा या विधानसभा जैसे चुनावों पर असर नहीं होगा और बड़े पैमाने पर  ईवीएम मशीन हैक करने पर उसे छिपा पाना असंभव है। इसलिए फिलहाल तो लगता नहीं कि ईवीएम मशीन हैक करके एक पार्टी चुनाव जीत सकती है।

अब बात कुछ नेताओं और पत्रकारों की जो ईवीएम मशीन हैक होने का राग अलापते रहते हैं तो बस इतना समझ लीजिए कि वो अपने पार्टी या पत्रकारिता के एजेंडे के अनुसार खबरों के कुछ टुकड़ों का उठाकर बात का बतंगड़ बनाने की कोशिश करते रहते हैं और आगे भी करते रहेंगे।

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