Monday, March 1, 2021

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Sonia Gandhi

The strange relations: Remembering Pranab Mukherjee

The man, who, according to many Congressmen, should have succeeded Indira by merit, was trashed by the dynasty as an example of poetic injustice, as it were.

उठापटक के बीच अब इस्तीफे के मूड में ‘सोनिया गांधी’

सूत्रों की मानें तो अब कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्षा कभी भी अपने पद से इस्तीफा दे सकती हैं। सोनिया गांधी के द्वारा लगातार यह कहा जा रहा है कि अब पार्टी को नए अध्यक्ष की तलाश करनी चाहिए।

What Ashok Gehlot’s got which Sachin Pilot has not?

Sachin Pilot has what Rahul Gandhi has - Legacy and age on his side! And also what Rahul lacks - Merit! More than anybody, He is a threat to the Gandhi Dynasty.

तुम मुझे जानते नहीं, मैं कौन हूँ

इस बात की खुशी है की आज, ६० साल “तुम मुझे जानते नहीं” वालों ने राज करने के बाद, "आप तो मुझे जानते हो" को मौका तो मिला। पर एक बात का डर अभी भी सताता है। कहीं फिर कोई "तुम मुझे जानते नहीं" का कोई बेटा या पोता फिर से हमारी जिन्दगी को इमरजेन्सी मे झोंकने या बोफ़ोर्स scam करने ना आ जायें।

Is it really Rahul Gandhi who’s ruining Congress?

Along with other ideological limitations, he may be a factor that is repelling voters for now. But if the economy continues to slide, voters may not be averse to relook at Rahul in 2024.

Is it really Rahul Gandhi who’s ruining Congress?

For the disastrous performance in 2014, if anyone has to be blamed it’s Sonia Gandhi and Manmohan Singh.

Why I believe Arnab Goswami

The reason for whatever happened is not because he spoke of her past. It is because he asked Sonia Gandhi to speak up on the Palghar incident.

क्या अलका लांबा सोनिया गांधी की नाजायज औलाद है?

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी कांग्रेस अधक्षया सोनिया गांधी को टारगेट करने के बाद अलका लांबा अर्नब गोस्वामी को टारगेट करने के लिए सोनिया गांधी की कुछ ज्यादा चपुलुसी कर रहीं हैं। यहाँ तक वह अपनी ट्विटर अकाउंट डीपी में सोनिया गांधी की फाटो लगाई हुई है।

नाम में बहुत कुछ रखा है

नाम में ही तो सबकुछ रखा है नाम से ही संस्कृति की पहचान, समाज का संस्कार, इतिहास की प्राचीनता और देश की धरोहर की गहराई का पता चलता है ।

Mumbai fiasco

BJP should have allowed the Maha Aghadi to tie itself in knots, its inherent contradictions would have surely made this alliance untenable in any distant terms.

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