Saturday, June 15, 2024

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#साहित्य #श्रद्धांजलि

शेषप्रश्नों के साथ उनका जाना

समझ में नहीं आता उन्होंने, लखनऊ का इतिहास लिखा, सहेजा या फिर लखनऊ को सिर्फ नवाबों और तवायफों में समेट दिया? चैती, सोहर, बन्ना जैसे लोकसाहित्य को लखनऊ का या अवध और अवधी का इतिहास नहीं कह सकते।

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