All posts by Dr Lalit Singh Rajpurohit

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भाषा विवाद का जिन

यदि हम इसी तरह भाषाई मामलों पर तल्‍खी लाते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब भारत के हालात भी यूरोप जैसे हो जाए। इसलिए एक स्‍थायी देश के निर्माण के लिए समाजवाद और राष्‍ट्रवाद दोनों जरूरी हैं, भाषाई विवाद नहीं।

राजभाषा हिंदी का विकास और यथास्थिति

बहुभाषी समाज में अपने विचारों के आदान-प्रदान के लिए संपर्क भाषा हिन्दी ही हो सकती है। हिन्दी भाषा समस्त देश-विदेशवासियों को एक सूत्र में बांधने वाली भाषा है।

खालिश हिंदी के नाम पर त्रिभाषी साइनबोर्ड का विरोध

बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अपने स्‍टेशनों के साइनबोर्डों को कन्‍नड़, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में लिखवाया तो बहुत से अंग्रेजीदां लोग इसके विरोध में उतर आए और इस मुद्दे को ट्वीटर पर ट्रोल किया जाने लगा।

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