Wednesday, December 2, 2020

TOPIC

BJP won 2014 elections

If Modi was a pill, he would never come sugar-coated

This time it will not be Right vs Left but a kind of “Right lower class” vs “Left upper class”.

मोदी जी, ऑपोसिशन के प्रोपगेंडे की मंडी और हम

2014 के पहले हमारे जन-नायक को कट्टर हिन्दू, मास-मर्डरर और न जाने क्या बनाया गया. अभी राहुल गांधी खुद एक हिन्दू प्रोडक्ट बन के बिकने के लिए आतुर है.

मोदी अबकी बार -400 के पार

जो हालात चल रहे हैं, उन्हें देखते हुए मोदी सरकार की २०१९ में कम से कम ४०० सीटें आएंगी-विपक्ष का षड्यंत्र अगर इसी तरह जारी रहा तो इन सीटों की संख्या बढ़ भी सकती है.

Why Rajasthan elections matter before 2019

Even though the govt has done good work in rural and urban areas of Rajasthan, winning won't be easy for BJP as the trend suggests.

Latest News

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 21

हमारे सनातन धर्म की मूल भावना "जीयो और जीने दो" तथा "सभी जीवो को अपना जीवन अपनी ईच्छा से जीने का अधिकार है" में निहित है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी अपने संपूर्ण जीवन काल मे प्रत्येक जीव के प्राण व दैहिक स्वतंत्रता को अमुल्य व सर्वोपरि मानकर प्रतिष्ठित किया

2020: An unprecedented, unpredictable, and uncertain year

Who could have imagined that the “unique 2020” would ironically turn into the most "unprecedented, unpredictable, and uncertain 2020" of historic proportions, perhaps not even worth remembering and writing about?

Mr. Ahmad Patel, they missed you!

Through the obituaries and condolences written by MSM journalists, one can easily see as to why these power brokers who used to enjoy the access to power corridors are so unnerved as they miss the absence of jugglers and conjurers in current regime.

गुपकार गैंग द्वारा रोशनी एक्ट की आड़ में किया गया 25000 करोड़ रुपए का घोटाला!

व्यवस्था का लाभ उठाकर 2001 से 2007 के बीच गुपकार गैंग वालों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर को जहाँ से मौका मिला वहाँ से लूटा, खसोटा, बेचा व नीलाम किया और बेचारी जनता मायूसी के अंधकार में मूकदर्शक बनी देखती रही।

Death of the farmer vote bank

While in the case of a farmer the reform delivered double benefit but the political class faces double whammy, that of losing its captive vote bank that was dependent on its sops and secondly losing the massive income they earned as middlemen between the farmer and the consumer. Either the farmer is misinformed or wrongly instigated, otherwise it is impossible to conceive that any farmer should be actually unhappy or opposed for being given more choices, as to whom to sell their produce.

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गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था के मध्य अंतर और हमारे इतिहास के साथ किया गया खिलवाड़

वास्तव में सनातन में जिस वर्ण व्यवस्था की परिकल्पना की गई उसी वर्ण व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके समाज में जाति व्यवस्था को स्थापित कर दिया गया। समस्या यह है कि आज वर्ण और जाति को एक समान माना जाता है जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

The story of Lord Jagannath and Krishna’s heart

But do we really know the significance of this temple and the story behind the incomplete idols of Lord Jagannath, Lord Balabhadra and Maa Shubhadra?

Pt Deen Dayal Upadhyaya and Integral Humanism

According to Upadhyaya, the primary concern in India must be to develop an indigenous economic model that puts the human being at centre stage.