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अंधविश्वास में हत्या क्यों?

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अंधविश्वास में हत्या क्यों?
gopalganj

जिला गोपालगंज का नाम सुने हैं? जी हाँ वही गोपालगंज जिसे वीरभूमि कहते हैं। माँ थावे धाम कहा जाता है गोपालगंज की हर माँ अपनी मातृभूमि की रक्षा हेतु एक बेटा जरूर पैदा करती है। उसी गोपालगंज में मस्जिद को शक्तिशाली बनाने के लिए बच्चे की दी बलि, पुलिस प्रताड़ना के बाद हिन्दू परिवार को छोड़ना पड़ा गाँव…

जी हाँ, चौकिए मत..

इस घटना नें गोपालगंज की धरती को शर्मसार कर दिया..

बिहार में पुलिस और प्रशासन की असंवेदनशीलता का एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला कि कोई भी काँप उठे। एक असहाय और ग़रीब परिवार के बच्चे को मस्जिद में ले जाकर मार डाला गया। इसके बाद उसे नदी में फेंक दिया गया। जब माता-पिता पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुँचे तो उन्हें पुलिस ने मारा-पीटा। मजबूरन उन्हें घर छोड़ कर भागना पड़ा। अब वो उत्तर प्रदेश के एक इलाक़े में रह रहे हैं।

राजेश जायसवाल का परिवार ग़रीब है, जो पकौड़े बेच कर अपना गुजर-बसर करता था। मार्च 28, 2020 को कुछ लड़के आए और उनके नाबालिग बच्चे को क्रिकेट खेलने के बहाने बुला कर ले गए। पीड़ित राजेश ने मीडियाकर्मी से बात करते हुए बताया कि ये सभी बच्चे मुसलमान थे।

उनका कहना है कि उनके 15 वर्षीय बेटे रोहित को पहले मस्जिद में ले जाया गया, जहाँ उसकी ‘बलि’ दी गई। गाँव में नया मस्जिद बना है। मुस्लिमों के बीच ये चर्चा आम थी कि अगर किसी हिन्दू की ‘बलि’ दे दी जाए तो मस्जिद शक्तिशाली हो जाएगा और इसका प्रभाव बढ़ जाएगा। राजेश का कहना है कि असल में बच्चों के बहाने उनके नाबालिग बेटे को बुलाया गया। मस्जिद में उन बच्चों के गार्जियन पहले से इन्तजार कर रहे थे, जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया।

राजेश जब पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर पहली बार गए थे, तब थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी रिपोर्ट लिखने में आनाकानी कर रहे थे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि वो राजेश को सरकार से 8 लाख रुपए बतौर मुआवजा दिला देंगे और उन्हें एफआईआर नहीं दर्ज करानी चाहिए। राजेश का आरोप है कि पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी अपने मन मुताबिक बनवाई। बच्चे के मृत शरीर को 2-3 मिनट के लिए अंदर ले जाया गया और पोस्टमॉर्टम कर लिए जाने की बात कही गई।

सोचिए.. ये हमारे भारत में हो रहा है।

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