Thursday, June 4, 2020

Featuredarticles

एक मुख्यमंत्री जो भली भांति जानता है कि संकट को अवसर में किस प्रकार परिवर्तित करना है: भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री के प्रयासों...

भारत के इन सेक्युलर, लिबरल और वामपंथियों को यह रास नहीं आया कि भगवा धारण करने वाला एक हिन्दू सन्यासी कैसे भारत के सबसे बड़े राज्य का प्रशासक हो सकता है। लेकिन यह हुआ।

आपको पता भी नहीं है और आपके मंदिरों को लूटने के षड़यंत्र रचे जा रहे हैं

मंदिर हमारी धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था के केंद्र रहे हैं। सनातन धर्म की स्थापना में मंदिरों का योगदान सहस्त्राब्दियों से सर्वोच्च रहा है। ऐसे में हम कुछ दो चार पाखंडी वामपंथियों और विधर्मियों के हाथों अपने धार्मिक केंद्रों का नाश नहीं होने देंगे। हमें विरोध करना होगा।

US – China cold war – How did it come to this

Inception of 'Chimerica' - An unnatural Communist - Capitalist partnership which lasted for more than 4 decades and why did it break.

तीन ऐसे लोग जिन्होंने बताया कि पराजय अंत नहीं अपितु आरम्भ है: पढ़िए इन तीन राजनैतिक योद्धाओं की कहानी

ये तीन लोग हैं केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, दिल्ली भाजपा के युवा एवं ऊर्जावान नेता एवं समाजसेवी कपिल मिश्रा एवं तजिंदर पाल सिंह बग्गा। इन तीनों की कहानी बड़ी ही रोचक एवं प्रेरणादायी है।

Unprecedented Covid-19 health crisis: The trial and tribulations of the Global Economy

The policymakers have to play a significant part in relaxing the restrictions in such a manner that at the one end, steepness of crisis is brought to baseline while on the other end; economic functions are alleviated with proper credit security by the government.

Understanding Modiphobia

Modiphobia is something which has become a mainstream school of thought, at this point of time. It has acquired a status that has turned out to be worthy enough for a deep academic research.

Building gender inclusive cities

Time and again women are constantly troubled by the fear of violence while using public spaces but what they actually jeopardy is essentially the opportunity of experiencing the civic life and being able to participate in city.

एकतरफा धर्मनिरपेक्षता (सेकुलरिज्म) की मृग मरीचिका

भारतवर्ष का लोकतंत्र ही ऐसा है कि यहाँ हिंदुओं को अपने अधिकारों की प्राप्ति के स्वयं युद्ध करना होगा। इसके लिए आवश्यक है हिंदुओं का संगठित होना। हिन्दू एकता ही महान भारतवर्ष के निर्माण का पहला और आखिरी समाधान है।

Rice to Ethanol: A survival cum revival plan

India has sufficient amount of grains to avoid any starvation like situation

The Arnabs must WIN

It's been more than 7 hours #ArnabGoswami is being interrogated even as the culprits who attacked him have been granted bail. How pathetic!

श्री अरविंद केजीरिवाल से १६ सवाल और एक विनम्र अपील देशवासियों से

1. सबसे पहला सवाल आपने किस मुस्लिम नेता के दवाब में मरकज  में 5000+ लोगो को आने दिया ?

Road-map for government actions during and after the coronavirus pandemic

This article provides the steps that governments should be taking as their countries move along the pandemic curve

Hindiहिन्दी में
ऑपइंडिया के लिए आपके लिखे लेख

2020 अमेरिका का सब से खराब साल बनने जा रहा है? पहले COVID-19 और फिर दंगे

America फिर से जल रहा है: आंशिक रूप से, जैसा कि हिंसा भड़कती है, पुलिस और उनके वाहनों पर हमला किया जाता...

भारत चीन सीमा विवाद और व्यापार घाटा

इस समय भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है कि चीन से निकलने वाली कंपनियों का भारत में स्थापित करवाएं और वह सब सहूलियत दे जो चाहते हैं। जिससे भारत एक विनिर्माण का केंद्र बन सके और इस महामारी के समय जो युवा रोजगार विहिन है उनको रोजगार मिल सके।

कोरोना काल: स्कूल बनाम अभिवावक

क्या बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ स्कूल की है, अभिभावकों की बिल्कुल भी नहीं? क्या कोरोनावायरस वैश्विक महामारी में जब दुनिया ज़्यादा से ज़्यादा चीजों को ऑनलाइन कर रही है तो ऑनलाइन शिक्षा से परहेज़ क्यों?

रचनाधर्मियों को गर्भस्थ बेटी का उत्तर

जो तुम्हें अग्नि परीक्षा देती असहाय सीता दिखती है, वो मुझे प्रबल आत्मविश्वास की धनी वो योद्धा दिखाई देती है जिसने रावण के आत्मविश्वास को छलनी कर इस धरा को रावण से मुक्त कराया.

“वैचारिक अधिनायकवाद”

अमेरिका में जो पुलिस द्वारा असंवेदनशील और बर्बर कृत्य हुआ उसका हम जब अवलोकन करते है तो पाते है कि इस घटना की निंदा और विरोध का जो आंदोलन है वो अपने उद्देश्य से दूर कहीं वैचारिक उन्मादी और हिंसक पशु समान लोगो के हाथों में पहुंच गया है जिनको एक चिंगारी की आवयश्कता थी अपनी कुंठा बाहर निकालने के लिए.

श्रमिकों का पलायन: अवधारणा

अंत में जब कोविड 19 के दौर में श्रमिक संकट ने कुछ दबी वास्तविकताओं से दो चार किया है. तो क्यों ना इस संकट को अवसर में बदल दिया जाए.

The politics and commerce of anti-Hindu content in mass media

In the past few years in India, we have come across an unusual situation where a number of mass media outlets seem to be “two timers” as in one branch of the organization will support the nationalist narrative and the other will support the leftist narrative.

Media: A stain on democracy

if media houses (considered as fourth pillar of democracy) really want to help migrant workers they should have done that and this crisis was got resolved till now, but what they worried for is just only for their so-called "prime time show reports".

कोई गणित का मास्टर है या क्रिकेट का फैन लेकिन भारत में उसे जिहाद फैलाने का अधिकार नहीं मिलेगा

भारतीय मीडिया की एक महान विशेषता है कि उसके पास किसी अपराधी या आतंकी के अपराध को छुपा देने की रेसिपी है।

Why Ravish Kumar is more dangerous than other contemporary news anchors

Anchors like Ravish Kumar who declare themselves neutral and inert to any political influence are the most dangerous ones because they can camouflage their political narratives as news by decorating it with false but sensational information, relatable characters and conventional ‘Governments don’t care about poor’ sentiments.

All Articles