Wednesday, June 3, 2020

Featuredarticles

PM-CARES: Why it is not under the ambit of RTI

PM-NRF, a similar trust was set up by PM, Jawaharlal Nehru in his "personal capacity" in the year 1948. Interestingly, PM-NRF too, isn't under the purview of RTI and CAG.

रचनाधर्मियों को गर्भस्थ बेटी का उत्तर

जो तुम्हें अग्नि परीक्षा देती असहाय सीता दिखती है, वो मुझे प्रबल आत्मविश्वास की धनी वो योद्धा दिखाई देती है जिसने रावण के आत्मविश्वास को छलनी कर इस धरा को रावण से मुक्त कराया.

When we fought with just hope: A heart touching tale of 1962 India China war

A battle which broke Chinese morale, as 1300 Chinese fell in order to capture 120 Indians.

कोरोना काल: स्कूल बनाम अभिवावक

क्या बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ स्कूल की है, अभिभावकों की बिल्कुल भी नहीं? क्या कोरोनावायरस वैश्विक महामारी में जब दुनिया ज़्यादा से ज़्यादा चीजों को ऑनलाइन कर रही है तो ऑनलाइन शिक्षा से परहेज़ क्यों?

तीन ऐसे लोग जिन्होंने बताया कि पराजय अंत नहीं अपितु आरम्भ है: पढ़िए इन तीन राजनैतिक योद्धाओं की कहानी

ये तीन लोग हैं केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, दिल्ली भाजपा के युवा एवं ऊर्जावान नेता एवं समाजसेवी कपिल मिश्रा एवं तजिंदर पाल सिंह बग्गा। इन तीनों की कहानी बड़ी ही रोचक एवं प्रेरणादायी है।

Unprecedented Covid-19 health crisis: The trial and tribulations of the Global Economy

The policymakers have to play a significant part in relaxing the restrictions in such a manner that at the one end, steepness of crisis is brought to baseline while on the other end; economic functions are alleviated with proper credit security by the government.

Understanding Modiphobia

Modiphobia is something which has become a mainstream school of thought, at this point of time. It has acquired a status that has turned out to be worthy enough for a deep academic research.

Building gender inclusive cities

Time and again women are constantly troubled by the fear of violence while using public spaces but what they actually jeopardy is essentially the opportunity of experiencing the civic life and being able to participate in city.

एकतरफा धर्मनिरपेक्षता (सेकुलरिज्म) की मृग मरीचिका

भारतवर्ष का लोकतंत्र ही ऐसा है कि यहाँ हिंदुओं को अपने अधिकारों की प्राप्ति के स्वयं युद्ध करना होगा। इसके लिए आवश्यक है हिंदुओं का संगठित होना। हिन्दू एकता ही महान भारतवर्ष के निर्माण का पहला और आखिरी समाधान है।

Rice to Ethanol: A survival cum revival plan

India has sufficient amount of grains to avoid any starvation like situation

The Arnabs must WIN

It's been more than 7 hours #ArnabGoswami is being interrogated even as the culprits who attacked him have been granted bail. How pathetic!

श्री अरविंद केजीरिवाल से १६ सवाल और एक विनम्र अपील देशवासियों से

1. सबसे पहला सवाल आपने किस मुस्लिम नेता के दवाब में मरकज  में 5000+ लोगो को आने दिया ?

Road-map for government actions during and after the coronavirus pandemic

This article provides the steps that governments should be taking as their countries move along the pandemic curve

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ऑपइंडिया के लिए आपके लिखे लेख

कोरोना की यात्रा और कोरोना के बाद की यात्रा

सकारात्मक खबर के बावजूद अभी भी कई चुनौतियां बना हुआ है जैसे-अप्रवासी मजदूर के समुचित खाने की व्यवस्था, बन्द पड़े शिक्षण संस्थान में पढ़ाई शुरू करने की चुनौती, कोरॉना के बाद अर्थवयवस्था के पुनरुद्धार की चुनौती, साथ वैक्सीन बनने की चुनौती, भविष्य में प्रसार रोकते हुए जनजीवन सामान्य बनाने की चुनौतीl

समीक्षा: प्रेमचंद की छिपी हुई कहानी ‘जिहाद’ की

आत्मगौरव, निजधर्म के सम्मान में वह मुसलमान हो जाने के स्थान पर मृत्यु को वरीयता देता है और जिहादियों के हाथों मारा जाता है। यही प्रेम त्रिकोण का टर्निंग पॉइंट बनता है।

पंथ, समाज शास्त्र और अर्थशास्त्र

भारत वो देश है जहाँ सनातन संस्कृति में कई पंथों ने जन्म लिया और लोग अपनी स्व: इच्छा से इनसे जुड़ते गए। क्योंकि सनातन ने ये आज़ादी सभी को हमेशा दी की आप अपने पंथ को व्यक्तिगत तरीके से चुने।

ऊपर लदी थी प्याज की बोरियां,नीचे थे गौवंश, वाहन में आपातकालीन ड्यूटी की स्टीकर लगाकर की जा रही है गौवंशों की तस्करी

झारखंड में झारखंड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 लागू होने के लगभग 15 वर्ष पूरे होने को हैं। इसके बावजूद प्रशासन की नाक के नीचे प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी लगातार हो रही है।

‘लोकतंत्र’ कट्टर मुस्लिमों तथाकथित अल्पसंख्यकों के लिए एक अवसर

हमारे देश के अल्पसंख्यक कट्टर धार्मिक समूह ने धर्मनिरपेक्ष शब्द का अपने फायदे के लिए हमेशा गलत इस्तेमाल किया।वह चाहे शाहीन बाग हो या बाबरी मस्जिद। उनके इस कृत्य में हमारे देश के तथाकथित इतिहासकार और वामपंथी समूह ने बराबर साथ दिया।

ज़रूरत कम, दिखावा ज्यादा

जो कुछ भी दिख रहा अथवा हो रहा है, सब किसी न किसी उद्देश्य या जरुरत को पूरा करने के लिए है। इंसान जो भी करता है, किसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए या तो किसी स्वार्थवश ही करता है, चाहे वह कितना भी इस बात को नकार दे।

The politics and commerce of anti-Hindu content in mass media

In the past few years in India, we have come across an unusual situation where a number of mass media outlets seem to be “two timers” as in one branch of the organization will support the nationalist narrative and the other will support the leftist narrative.

Media: A stain on democracy

if media houses (considered as fourth pillar of democracy) really want to help migrant workers they should have done that and this crisis was got resolved till now, but what they worried for is just only for their so-called "prime time show reports".

कोई गणित का मास्टर है या क्रिकेट का फैन लेकिन भारत में उसे जिहाद फैलाने का अधिकार नहीं मिलेगा

भारतीय मीडिया की एक महान विशेषता है कि उसके पास किसी अपराधी या आतंकी के अपराध को छुपा देने की रेसिपी है।

Why Ravish Kumar is more dangerous than other contemporary news anchors

Anchors like Ravish Kumar who declare themselves neutral and inert to any political influence are the most dangerous ones because they can camouflage their political narratives as news by decorating it with false but sensational information, relatable characters and conventional ‘Governments don’t care about poor’ sentiments.

All Articles

अभिसार शर्मा के नाम इक खुला खत, संदीप कुमार के मुद्दे पर

आम आदमी पार्टी के मुखपत्र जनता का रिपोर्टर पर अभिसार के लेख का जवाब

Service to Humanity is the last refuge of a fraud – the other aspect of Mother Teresa

Some uncomfortable facts about Mother Teresa that shows she was no Saint by any means.

Strategy of Reliance Jio in 3 points

Reliance Jio has almost captured the data market and has left people wondering its strategy. Here is a take on its strategy.

College Education: The Wrath of Attendance

Suicide Sushant Rohilla has brought to the fore a very germane question pertaining to college education.

The saboteurs who resist “Acche Din”

How and where are we standing in terms of Acche Din

The attendance fiasco of Sushant Rohilla

Suicide case of Sushant Rohilla exposes the

Thanks Harsh Mander ! So this is what dhimmitude truly looks like

A glimpse of the future that liberals have visualized for the Hindus of this land

The Rattling of Hit and Run Journalists

Social media has levelled the playing field

भकसाला से घबराये प्रेस्टिट्यूट

सोशल मीडिया पर लेफ्ट विंग प्रोपगैंडा करनेवालों की पोल खोलने के कारण प्रेस्टिट्यूट समाज भकसाला के खिलाफ एकजुट हो गया है।