जिस तरह आतंकवादी का धर्म नहीं होता उसी तरह दलित को मारने वाले की जाति नहीं होती है

जो लोग एक तरफ आतंकवादी हमले के बाद यह कहते फिरते हैं कि आतंकवादी का कोई मजहब नहीं होता है वहीं लोग प्रेम विवाह हत्या मामले के बाद हत्यारों की जाति जोर-जोर से चिल्लाकर बताते हैं।

रवीश कुमार के लिए एक फ़ैन का खुला पत्र

मैं वैसे तो टीवी नहीं देखा परंतु पिछले दस दिन में आपका तीन कार्यक्रम देख लिया है। हर कार्यक्रम में एक बात जो सामान्य थी वो यह थी कि यदि सोशल मीडिया ना होता तो शायद आज भारत सोने की चिड़िया होता।