बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं के बीच बेटीओं का बलात्कार

हमारे यहां राम मंदिर और मस्जिद बनाने के लिए तो संगठन बन सकते हैं। पर बलात्कार और शोषण जैसे घटनाओं को रोकने के लिए क्यों नहीं।

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The fear of losing

Protesting for selective crimes is not going to fix anything, it would only create a perception that Indians are well aware of the problem and are willing to fix  them.