आखिर क्या कारण है की ‘लेफ़्ट’ इतना बलवान और ‘राइट’ इतना कमज़ोर है?

पत्रकारिता को बेचने वाले वामपंथियों के झूठ से त्रस्त होकर लोग अब राइट की ऒर रुख कर रहे हैं। जब तक राइट विंग मीडिया एक ‘सुर में गाने’ का अभ्यास नहीं करेगी तब तक राइट कि आवाज़ लोगों तक नहीं पहुंचेगी।

Why not Hindi?

Do we once again fall into this trap and get divided or do we say enough and believe that we all are Indians and the division is only in the eyes of those liberals who try to influence us?

उदारवादियों को क्यों खटकती है स्टेचू ऑफ़ यूनिटी?

नेहरू गाँधी खानदान की महानता की जो गाथाए जो बड़ी मेहनत से बनायीं गयी हैं, और जनता के सामने एक छवि प्रस्तुत की गयी हैं, उस पर घनघोर खतरा हो उत्पन्न हो गया हैं।