Sunday, November 1, 2020
Home Hindi आज न सिर्फ उत्सव मानना है अपितु कार सेवकों के बलिदान को याद कर...

आज न सिर्फ उत्सव मानना है अपितु कार सेवकों के बलिदान को याद कर प्रपंचों से भी लड़ना है

Also Read

आज प्रभु राम की नगरी में भव्य मंदिर का शिलान्यास हो रहा है, इस अवसर पर अयोध्या नगरी ही नहीं सम्पूर्ण भारतवर्ष ही अपने आराध्य के लिये सजा हुआ है। किंतु इस उत्सव के मध्य उन लोगों को भी याद रखना आवश्यक है, जिन्होंने इस पुण्य यज्ञ में अपने जीवन को आहूत किया है। यह उन लोगों के प्रति न सिर्फ कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराने का भी समय है कि आखिर कितने संघर्ष के पश्चात यह सुअवसर प्राप्त हुआ है। जिस तरह प्रभु श्रीराम ने जब रावण का संहार किया तो उनकी सेना के भी कई सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे, उसी तरह वर्तमान में प्रभु राम के मंदिर के लिये भी हज़ारों राम भक्त कार सेवकों ने अपने प्राण आहूत किए हैं।

आज जब बाबर की बर्बरता को सुधार कर करोड़ों राम भक्तों को न्याय मिल रहा है तो वक्रदृष्टा एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में इस शिलान्यास तथा इसके लिये बलिदान देने वाले और इससे जुड़े व्यक्तियों की छवि को धूमिल करने के प्रयास भी तेज़ हो गए हैं। आगामी दिनों में संविधान, सेक्युलरिज्म और कोरोना को आधार बनाकर कई प्रपंच रचे जाएंगे। इसके नमूने भी दिखने लग गए हैं तथा अलग-अलग समूह ने जिहादी और वामपंथी विचार से प्रेरित होकर सोशल मीडिया पर नकारात्मक ट्रेंड चलना प्रारंभ कर दिया है। जैसे- जैसे मंदिर निर्माण परवान चढ़ता जाएगा, वैसे- वैसे इस समूह की गतिविधियां तीव्र हो जाएंगी।

अब प्रश्न उठता है कि इन वक्रदृष्टा जिहादी और वामपंथी कलुषों के साथ क्या किया जाए? पहला विकल्प है कि इन्हें यूहीं महत्त्वहीन मानकर छोड़ दिया जाए। वहीं दूसरा विकल्प है कि हम अपने उत्साह और आनंद की चरम अभिव्यक्ति करें तथा इन्हें स्वयं की ईर्ष्या अग्नि में भस्म हो जाने दें। इतना ही नहीं इनके हर प्रपंच पर तीक्ष्ण हमला करें तथा इनके हर तर्कहीन बौद्धिक हमले का आक्रमकता से प्रतिउत्तर दें। 

आज न सिर्फ श्रीराम के चरित्र की महिमा जानना है, बल्कि उनके मंदिर निर्माण के लिये अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वालों के बारे में भी जानना आवश्यक है। देश के हर शहर, कस्बे और गांव के कार सेवकों ने क्रूर अनाचारी मुख्यमंत्री के आदेश पर चली गोलियों से अपने प्राण गवांए थे या अपने शरीर को क्षित-विक्षिप्त किया था। आज इन राम भक्तों के शत्रुओं को पहचानने का भी दिन है। इसके साथ ही राम मंदिर निर्माण को न्यायालय में हर प्रकार से रोकने का प्रयास करने वाले राजनीतिक दल के रामभक्त होने के दावे के पाखंड को भी सार्वजनिक करने का दिन है। आज न सिर्फ राम मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है, बल्कि नए भारत निर्माण के संकल्प का वास्तविक आगाज भी हो रहा है। आज से हर राम भक्त दायित्व है कि अपने धर्म के विरुद्ध रचे जाने वाले प्रपंच और मिथ्या दुष्प्रचार का खंडन करे तथा अपने धर्म और कार सेवकों के बलिदान की शुचिता बनाए रखे।

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

- Advertisement -

Latest News

सूमो, नमो और नीमो

सूमो बाबू, को जब CM का संदेसा मिला, तब दोपहर ढल रही थी। वह Secretary के साथ GST Council की दो दिनों...

The fraud of ‘Islamophobia’

The most fraudulent term in today’s English language is “Islamophobia”. It is an absolute misnomer. Islamic and Left-Liberal groups, in their political correctness, use ‘Islamophobia’ to safe guard and cover up Islamic terrorism only.

Why Nikita Tomars of Secular nations will become BalikaVadhu?

Europe will soon have to start Balika Vadhu and ghunghat within few decades if they wish to survive against jihadis as they are fast approaching a great civil war.

Indian texts are riddled with controversial claims; but only if you deliberately decide to isolate the sayings

Neither birth, nor initiation, no descent, nor bookish knowledge determines a person's merit; only their actual conduct, expressed qualities and virtues determine one's merit. There is no superior caste, claims Shanti Parva.

Hypocrisy – Thy name is Bollywood

Attacking the messenger ideology has left Bollywood totally exposed in the eye of the common public, damage control would have been better organised by owning up to mistakes made and assuring cooperation with the authorities.

Reports make inaccurate claims of the benefits of raising the legal age for women’s marriage

An SBI Ecowrap report has made several inaccurate claims regarding the potential benefits of raising the legal age of marriage of women.

Recently Popular

नए आत्मनिर्भर बिहार का रोडमैप

इस लेख में मैं लालू यादव जी के 15 वर्षों के शासन का तुलनात्मक अध्ययन एनडीए के 15 वर्षों के शासन से भी करना चाहता हूँ, ताकि यह तथ्य स्थापित हो सके की भाजपा अपने घोषणापत्रों में जो कहती है उसे पूरा करती है.

The story of Lord Jagannath and Krishna’s heart

But do we really know the significance of this temple and the story behind the incomplete idols of Lord Jagannath, Lord Balabhadra and Maa Shubhadra?

The fraud of ‘Islamophobia’

The most fraudulent term in today’s English language is “Islamophobia”. It is an absolute misnomer. Islamic and Left-Liberal groups, in their political correctness, use ‘Islamophobia’ to safe guard and cover up Islamic terrorism only.

Pt Deen Dayal Upadhyaya and Integral Humanism

According to Upadhyaya, the primary concern in India must be to develop an indigenous economic model that puts the human being at centre stage.

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।