Friday, February 26, 2021
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आज का भारत

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मोदी जी ने आज जो कहा है पूरे इतिहास में भारत के किसी प्रधानमंत्री ने चीन के ख़िलाफ़ ऐसा स्टेटमेंट नही दिया था। मुझे खुद बड़ी हैरानी हुई, मुझे लगा मोदी जी डायरेक्ट पब्लिक में स्टेटमेंट नही देंगे।

आज मोदी का कद, नेहरू से बहुत ऊपर हो गया। इसका असर बहुत दूर तक होगा। चीनियों को समझना चाहिए भारत ने आज तक पूरी क्षमता के साथ तीनो सेनाओं का सयुंक्त अटैक किया ही नही है। हम चीन को कमजोर नही समझते क्योंकि दुश्मन को कमजोर समझना सबसे बड़ी बेवकूफ़ी होती है।

पर हम इतना जानते हैं, तबाही का मंजर यादगार होगा। भारत-चीन अगर अपनी पूरी ताकत से भिड़ गए तो सेकेंड वर्ड वार से भी भयानक त्रासदी होगी। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बैठ जाएगी, पूरा एशिया रुक जाएगा। चीन ख़्वाब में भी ये ना सोचे कि वो 62 की तरह हमे आसानी से हरा देंगे।

मोदी जी का स्टेटमेंट सुनिए – वो मारते मारते मरे हैं। US इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक भी चीन की भारी कैजुएलटी हुई है, मुझे ऐसा लगता है दोनों ओर का ही नुकसान हुआ है, पर एक बात एकदम साफ़ है।

भारत के जवान अटैक कभी नही करेंगे चीन पर, इसका कोई लॉजिक ही नही बनता। अटैक उन्होंने ही किया है और गज़ब का युद्ध कैशल दिखाया है हमारी सेना ने जिसने अचानक हुए अटैक का इतना शार्प रिस्पॉन्स दे दिया। चीन खुद को सुपर पावर समझता है, पूरी दुनिया मे बात आम हो गयी है चीन के सैनिक भी मरे हैं।

चीन इसको निश्चित रूप से हल्के में नही लेगा, 1962 की लड़ाईं तो मात्र इस वजह से उसने कर दी थी क्योंकि उसके सुप्रीम लीडर का पुतला भारत मे जलाया गया था, दलाई लामा को भारत ने सरंक्षण दिया था।

नेहरू बस माफीनामा ही भेजते रहे, समझाते रहे चीनियों को की हमारा देश लोकतंत्र है यहाँ तो मेरा ही पुतला बना कर लोग अक्सर जूतों से पीट देते हैं। हमारा आपके लीडर्स की बेज्जती का कोई इरादा नही है, इसी मान मनव्वल को चीन ने हमारी कमजोरी समझा था।

पर इस बार मोदी ने लाइन खींच दी है, विश्व को भी आगाह किया है की पागल हाथी बहुत विन्ध्वंस लाता है। डैगन की सारी आग उसी हिमालय में बर्फ बन जाएगी और हाँथी जिधर चलेगा उधर शमशान बनता जाएगा।

आग दिखानी है तो समंदर में दिखाओ, साउथ चाइना सी में दिखाओ, हिमालय की बर्फ में सब ठंडा हो जाता है। नरेंद मोदी भारत के अब तक के सबसे काबिल प्राइम मिनिस्टर हैं, नेहरू आज मीलों दूर छूट गए।

बौद्धिकता और लीडरशिप अलग चीजें होती हैं, जिनपिंग को समझना होगा अगर वो खुद को सनकी और बहुत बड़का साइकोलजिस्ट समझता है तो इधर मोदी भी कम पागल नही है। पागलों की भिड़ंत भयावह होगी, मोदी को नेहरू समझना बन्द करे चीन; ये वही मोदी है जो नवाज शरीफ की बेटी की शादी में गया था और उसके बाद पाकिस्तान को दो बार निबटा चुका है।

तुम्हे ही गेम खेलने नही आता, हम तुम्हारे बाप रहे हैं। न यकीन हो तो पुतिन से पूछ लेना, अपनी लुगाई इमरान से पूछ लेना..

फिलहाल LAC पर सेनाएँ दोनों देश की अब टैक्टिकल लोकेशन पर शिफ्ट होंगी, ऐसी लोकेशन्स जहाँ युद्ध के दौरान दुश्मन पर बढ़त मिले. चीन विश्व का नेता बनने निकला था, हिमालय की ओर न आता तो बन भी सकता था। भारत की भूमि ही ऐसी है, बड़े बड़े विजेता और नेता इधर खप जाते हैं।

पड़ी लकड़ी ले ली चीन ने, अच्छा भला US के ऊपर दबाव बना रहा था, साउथ चाइना सी में दादागिरी चल रही थी।

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