Advertisements
Monday, June 1, 2020
Home Hindi यौम-ए-आज़ादी पर इमरान ख़ाँँ

यौम-ए-आज़ादी पर इमरान ख़ाँँ

Also Read

लो कल्लो बात!

अनुमान लगाइए यह भाषण किसने दिया होगा?

“हाल के दिनों में मैंने जो ट्वीट किए हैं और पूरी दुनिया में जिसे फैलाने की कोशिश की है, वह है बीजेपी और नरेन्द्र मोदी की असलियत। इन्होंने कश्मीर में जो किया है, उससे हम पर एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। दुनिया में मफ़ादात (ज़मीनें वगैरह) के जो झगड़े होते हैं, उनके हल कुछ और तरीके से निकलते हैं, लेकिन हमारी जंग अब एक आइडियोलॉजी से है। यह आइडियोलॉजी आरएसएस की है, मोदी जिससे बचपन से ही जुड़ा हुआ है। यह आइडियोलॉजी एक फ़ासिस्ट आइडियोलॉजी है जो अपनी प्रेरणा हिटलर की नाज़ी आइडियोलॉजी से प्राप्त करती है। जैसे हिटलर की सोच थी कि जर्मन नस्ल दुनिया में सबसे श्रेष्ठ है, उसी तरह आरएसएस की सोच यह है कि हिन्दू एक सुपीरियर क़ौम है।”

 

“मुसलमानों से वह नफरत करते हैं। उनका ख्याल है कि मुसलमान अगर उनके मुल्क में न आए होते और उन पर 600 साल हुक़ूमत न की होती तो भारत इस समय दुनिया का अज़ीम मुल्क होता। इसी वजह से वह ईसाईयों से भी नफरत करते हैं। मुसलमानों की तो वह नस्ल ही ख़त्म कर देना चाहते हैं। जब तक आप यह आइडियोलॉजी नहीं समझ लेते, तब तक आप कश्मीर में जो हो रहा है, उसे नहीं समझ सकते। पाकिस्तान इसी आइडियोलॉजी की वजह से बना। गुजरात में 2002 में जो मुसलमानों का कत्लेआम हुआ जिसमें औरतों और बच्चों के साथ इन्तहाई ज़ुल्म हुए, उनके पीछे यही आइडियोलॉजी थी। इससे पहले बाबरी मस्जिद शहीद कर दी गई। आजकल यह जो गौमांस खाने वालों की लिंचिंग वगैरह की घटनाएं हो रही हैं, वह इसी आइडियोलॉजी की वजह से हो रही हैं।”

“कश्मीर में अब जो इन लोगों ने किया है, वह एक तरह से हिटलर के फाइनल सलूशन की तरह है। हम सभी इस बात को लेकर ख़ौफ़ज़दा हैं कि जब कश्मीर से कर्फ्यू हटेगा, तो वहां से क्या ख़बरें आएंगी? वहां लोगों पर क्या-क्या ज़ुलूमात हो रहे होंगे! हमारी जंग इस आरएसएस की आइडियोलॉजी से है। कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म करके मोदी ने एक बहुत बड़ी गलती की है। अब वह कश्मीर के मसले का अन्तरराष्ट्रीयकरण नहीं रोक सकते। दुनिया देखेगी कि इस आइडियोलॉजी ने कश्मीरियों के साथ क्या-क्या ज़ुल्म किए और मैं हलफ़ लेता हूं कि मैं दुनिया को कश्मीर की हकीकत बताऊँगा। कश्मीर के लिए दुनिया में उसका ऐंबेसडर मैं बनूंगा।”

“यह वह आइडियोलॉजी है जिसने पूरी दुनिया में तबाही मचाई है। मशरिक़ी दुनिया को इसके बारे में ज्यादा नहीं पता। वह समझते हैं कि भारत अभी भी वही पुराना सेक्युलरिज़्म, कर्म, निर्वाण वाला, ओपन सोसाइटी वाला सहिष्णु देश होगा, पर ऐसा नहीं है। इस आइडियोलॉजी ने तो देश के संविधान को रद्द किया, सुप्रीम कोर्ट और जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के फैसलों की धज्जियां उड़ाईं और इस तरह मुल्क को बर्बादी की तरफ़ धकेल दिया। मुल्क में इस समय डर का माहौल है। कोर्ट के जज, विपक्ष के नेता और मीडिया के लोग दहशत में जी रहे हैं। मुसलमान तो ख़ौफ़ में हैं। यह ज्यादा दिन नहीं चल सकता। इसकी प्रतिक्रिया तो होगी। दुनिया में जहां कहीं किसी आबादी को इस तरह दबाया गया है, वहां रैडिक्लाइज़ेशन हुआ है। भारत में भी होगा। आरएसएस का जिन्न अब बॉटल से निकल गया है। अब यह वापस नहीं जाएगा। इसके बाद सिखों, ईसाईयों और दलितों पर ज़ुल्म होगा। मुल्क अब बर्बाद होकर रहेगा।”

 

सोचिए, यह भाषण किसने दिया होगा? राहुल गांधी? ममता बनर्जी? अरविंद केजरीवाल? असदुद्दीन ओवैसी? मणिशंकर अय्यर? दिग्विजय सिंह? पी चिदम्बरम? अखिलेश यादव? मायावती? फारूक/ओमर अब्दुल्ला? महबूबा मुफ़्ती?

आप ठीक सोच रहे हैं। ऐसा भाषण इनमें से कोई भी दे सकता है। दरअसल इन सभी के मुँह से आपने ऐसी बातें कभी न कभी ज़रूर सुनी होंगी पर हाल में यह भाषण दिया है पाकिस्तान के मौजूदा वज़ीर-ए-आज़म इमरान खाँँ ने। जगह थी मुज़फ़्फ़राबाद और मौक़ा था पाकिस्तान के यौमेआज़ादी (यानी 14 अगस्त 2019) का। तो वज़ीर-ए-आज़म साहब अपने मुल्क की आज़ादी के दिन अपने मुल्क से मुख़ातिब थे। आम तौर पर पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म यौमेआज़ादी के रोज़ अपनी रिआया से इस्लामाबाद के लाल किले जैसी किसी जगह से ख़िताब करते हैं, पर इमरान खाँँ ने इस मौके पर मुज़फ़्फ़राबाद में पीओके की असेंबली से रूबरू होना ज़्यादा मुनासिब या शायद ज़्यादा महफूज़ समझा।

इमरान खाँँ आगे कहते हैं कि आरएसएस का जिन्न यहीं नहीं रुकेगा। यह भारत से पाकिस्तान की ओर बढ़ेगा। मक़बूज़ा कश्मीर में जो कुछ यह कर रहे हैं, उससे दुनिया की नज़र हटाने के लिए यह अब पीओके पर हमला करेंगे। हमारे पास (इमरान खाँँ के पास) पक्की जानकारी है। यह अब पीओके में, जिस तरह इन्होंने पुलवामा के बाद बालाकोट में ऐक्शन लिया था। उससे भी भयानक कार्रवाई करने जा रहे हैं पर वह समझ लें कि अगर इन्होंने कोई ऐसी हिमाक़त की तो ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। इसी तरह की दो-चार फ़ौरी किस्म की धमकियाँँ देने, मुसलमानों की बहादुरी और लाइलाहाइलल्लाह के ज़िक्र के बाद इमरान ने एक बार फ़िर कश्मीर की नुमाइन्दगी यूएनओ की सिक्यूरिटी कौंसिल और आईसीजे में शिद्दत के साथ करने का अपना क़ौल दुहराया और अपनी लगभग 36 मिनट की तक़रीर ख़त्म की।

 

इमरान खाँ की इस तक़रीर में ध्यान देने की कई बातें हैं जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं:
1. मौका मुल्क की यौम-ए-आज़ादी का था पर पूरी तक़रीर में एक बार भी पाकिस्तान और आज़ादी का ज़िक्र ही नहीं किया गया और पूरी तक़रीर मोदी और आरएसएस पर केंद्रित रखी गयी। ठीक यही तो अपने यहाँँ के राहुलजी जैसे नेताओं का भी शगल है!

2. उन्होंने तसलीम किया कि पुलवामा के बाद भारत ने बालाकोट में जवाबी कार्रवाई की थी।

3. उन्होंने यह भी तसलीम किया कि पाकिस्तान अपनी तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं करेगा (क्योंकि आक्रामक युद्ध इस्लाम के मूलभूत सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है), और वह भारत के ख़िलाफ़ कुछ तभी करेगा जब हमले की कार्रवाई भारत की तरफ़ से हो। इस तरह उन्होंने कश्मीर की यथास्थिति को स्वीकार करने के संकेत दिए।

4. उन्होंने तसलीम किया कि आक्रामक न होते हुए भी कश्मीर और कश्मीरियों की लड़ाई शान्तिपूर्ण तरीकों से अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी नुमाइन्दगी करते हुए लड़ते रहेंगे।

अब इस तक़रीर की तुलना करें मोदी के भाषण से जिसमें उन्होंने एक बार भी पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया और करीब डेढ़ घण्टे तक अपनी पॉलिसी और कार्यक्रमों की बातें ही करते रहे, और एक बार फिर से अपने भाग्य पर इतराएं कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, इमरान खान नहीं, और राहुल गाँधी या ममता बनर्जी या अरविन्द केजरीवाल भी नहीं!

- advertisement -

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

Latest News

George Floyd, another forgotten soul

Everybody worried about and discussing the riots in multiple cities, looting of designer stores, rioting the streets. In all these noises, George Floyd is shouting “I can't breathe, please save me”

Is Trump right to take China on?

Trump has gone ballistic. His bellicose utterances are typically reflective of America First retinue. Would he stay the course? Or he has raised a feverish pitch, so that he can negotiate a sweet trade deal with China, just in time for Nov, 2020 elections.

The one way secularism and why tolerance is it’s necessary evil

So, Indians' tolerance level is directly proportionate to the govt they elect. If they want to be tolerant, they will elect a non BJP govt., if they want to decrease, they will elect Modi govt!

The politics and commerce of anti-Hindu content in mass media

In the past few years in India, we have come across an unusual situation where a number of mass media outlets seem to be “two timers” as in one branch of the organization will support the nationalist narrative and the other will support the leftist narrative.

कोरोना की यात्रा और कोरोना के बाद की यात्रा

सकारात्मक खबर के बावजूद अभी भी कई चुनौतियां बना हुआ है जैसे-अप्रवासी मजदूर के समुचित खाने की व्यवस्था, बन्द पड़े शिक्षण संस्थान में पढ़ाई शुरू करने की चुनौती, कोरॉना के बाद अर्थवयवस्था के पुनरुद्धार की चुनौती, साथ वैक्सीन बनने की चुनौती, भविष्य में प्रसार रोकते हुए जनजीवन सामान्य बनाने की चुनौतीl

The one difference between the Congress of today and that of before 2014

For the sake of the future generations, for the sake of our children, please read more books about how Congress had been ruling the country and be aware of the dangers.

Recently Popular

MNS bares its anti-Hindu fangs

Raj Thackeray’s haphazard attempt to relaunch his party as Hindu outfit has failed, leading to desperation and cheap politics.

साउथ कोरिया में संघ जरूरी क्यों

मैं विग़त 8 महीनो से साउथ कोरिया में रह रहा हूँ। यहाँ भारतीय लोगों की संख्या क़रीब 13 हज़ार हैं। पर एच॰एस॰एस न होने के आभाव में मैंने महसूस किया है, कि भारतीय लोग संगठित नहीं हैं। और संगठित नहीं होने के कारण लोग अपनी संस्कृति से दूर जा रहे हैं।

In conversation with Nehru: On Savarkar’s mercy petitions

This conversation is only an attempt to present the comparative study of jail terms served by both Savarkar and Jawaharlal Nehru.

भगवान श्रीराम का वनवास जो 500 वर्षों के बाद समाप्त हुआ: श्रीराम मंदिर निर्माण की अनंत कथा

अंततः श्रीराम विजयी हुए, भारतवर्ष विजयी हुआ, हिन्दू विजयी हुए और इस संघर्ष में दिए गए सहस्त्रों बलिदान सार्थक हुए।

Regional Benches of Supreme Court in your Homes?

While reluctantly acknowledging that the resort to Videoconferencing by Supreme Court and High Courts may be the need of the hour, at this moment of time, it ought not to stay beyond a minute of its need.