Thursday, April 22, 2021
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गुस्सा या आदत?

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कुछ लोग “माइनॉरिटी” के गुस्से का और भारत मे होने वाले दंगों, तोड़ फोड़ वगैरह का ये कह कर बचाव करते हैं कि ये बाबरी विध्वंस की वजह से हुआ है, कुछ कहते हैं ये मोदी जी के सत्ता में आने के बाद उनके मुस्लिम विरोधी नीति का नतीजा है तो कुछ इसे 2002 के घाव बताते हैं।

चलो मान लेते हैं कि बाबरी विध्वंस की वजह से गुस्सा और नफरत का माहौल बना और देश मे दंगे होने शुरू हुए, चलो मान लेते हैं 2002 के जख्म इसके कारण हैं,चलो ये भी मान लेते हैं कि मोदी के सत्ता में आने की वजह से ये हो रहा है तो इसका मतलब यही माना जाए न कि मानते हो दंगे के जिम्मेदार “माइनॉरिटी” समाज के लोग होते हैं?

भले ही वो गुस्से की वजह से हो!

पर बाबरी के गुस्से से दंगो को जस्टिफाई करने वालों ये बताओ की जून 1851 में “माइनॉरिटी”-पारसी दंगो को कैसे जस्टिफाई करोगे? बस एक छोटा सा लेख ही तो लिखा था “चित्रा दिनन दर्पण” नामक मैगजीन ने।

फिर 6 साल बाद भरूच में उसी का गुस्सा लेकर फिर से दंगे और 3 पारसियों का कत्ल कैसे जस्टिफाई करोगे?

1874 को वापस पारसियों और फिर 1882 में तमिलनाडु में हिन्दू मंदिर के प्रांगण में मस्जिद बनाने की जिद लेकर दंगे करना कैसे जस्टिफाई करोगे?

1921 का मपिल्ला दंगे याद है जब अंग्रेजों के साथ मिलकर मालाबार के रहवासी हिंदुओं का कत्लेआम किया गया था?
1927 के नागपुर दंगे तो याद ही होंगे और फिर 1946 में बंगाल में मुस्लिम लीग के इशारे पर 4000 हिंदुओं के कत्लेआम को कैसे किस गुस्से के साथ जस्टिफाई करोगे वो बता दो यार।

फिर उसी साल नवम्बर में हुए नोखली दंगे तो याद होंगे न, अलग देश की मांग में हजारों हिंदुओ को मौत के घाट उतार दिए थे?

याद है वो विभाजन का वो समय जब पाकिस्तान से ट्रेनों में भर कर हिंदुओ और सिखों की लाशें आया करती थी? सुना है 3 दिन तक सारी ट्रेनों में बस लाशें ही आती थी और किसी भी लड़की के बदन पर कपड़े नही पाये गए थे। घिन आती है सुन कर?

1967 के रांची वाले दंगे तो याद ही होंगे जब सिर्फ उर्दू भाषा को राजभाषा बनाने के लिए किए गए दंगे में सैकड़ों हिंदुओ का कत्लेआम किया गया था?या 1969 के गुजरात दंगे भी भूल गए जब दरगाह के जमीन के लिए “गुस्सा” उफन पड़ा था?

और वो 1983 के असम वाले दंगे तो याद करना भी नही चाहोगे क्योंकि तब यही तुम्हारे “जिगर के टुकड़े” घुसपैठियों के साथ मिलकर 10000 से ज्यादा स्थानीय असमीओं का कत्लेआम किया गया था, यही वजह है न उन्हें अभी भारत से भगाए जाने से विरोध के पीछे?

85, 87, 89 कितने दंगे याद दिलाऊं? बाबरी तो 90 में गिराया गया था न?
क्या कारण है कि हर दंगे में सिर्फ एक ही चीज कॉमन होती थी?
पारसी, सिख, हिन्दू यहां तक ईसाइयों तक के खिलाफ दंगों में शामिल रहे पर नहीं ये तो बाबरी की वजह से ही है, है न?

पाकिस्तान बाबरी की वजह से बना था? या फिर कश्मीर में पण्डितो को बाबरी की वजह से मार कर भगाया गया था?
क्या मिडिल ईस्ट में होने वाली सारी आतंकवादी घटनाएं बाबरी की वजह से ही हैं?
पाकिस्तान हो या अफगानिस्तान वहां तो मस्जिदों तक को निशाना बनाया जाता है, सब बाबरी का बदला लेने के लिए?

वैसे चलो मान लेते हैं ये सब की वजह हिन्दू हैं, तो जरा ये बताओ कि सीरिया, इराक, ईरान वगैरह देशों में कौन से हिन्दू बसते हैं? वहां क्यों रोजाना हजारों का खून बहाया जाता है? क्यों वहां शांति नहीं है?

इन सबको कोई वजह देकर जस्टिफाई करने से अच्छा अपने अंदर झांकें।

हम इतना सब होने के बाद भी हमेशा बाहें खोल कर आपका स्वागत किये हैं, आपको वही स्थान मिला हुआ है जो दूसरे कौम के लोगों का है। समाज के मुख्यधारा के साथ चलिए आप भी खुश रहोगे और दुनिया भी..

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