Thursday, November 26, 2020
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मोदी सरकार की मजबूती से बौखलाया विपक्ष देशद्रोह करने पर उतारू क्यों?

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RAJEEV GUPTAhttp://www.carajeevgupta.blogspot.in
Chartered Accountant,Blogger,Writer and Political Analyst. Author of the Book- इस दशक के नेता : नरेंद्र मोदी.

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने जबाबी कार्यवाही मे जिस तरह से पाकिस्तान के अंदर घुसकर उनके एक बड़े आतंकी संगठन का सफाया किया है, उसके जरिये भारत सरकार ने पाकिस्तान को सिर्फ यह संदेश देने की कोशिश की है कि सीमा पार से किसी भी तरह का आतंकवाद अब बर्दाश्त नही किया जायेगा. कुछ समय बाद भारत में लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं और उन चुनावों में अपनी राजनीति को चमकाने के लिये कुछ विपक्षी राजनीतिक पार्टियाँ और उनके नेता इस “सर्जिकल स्ट्राइक” के गलत मायने निकाल रहे हैं और यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि मोदी सरकार जान बूझ कर पाकिस्तान से युद्ध करने का माहौल बना रही है. विपक्षी नेता अपनी घटिया राजनीति करने के चक्कर में यह भी भूल गये हैं कि उनके इन गैर-जिम्मेदाराना बयानों की पाकिस्तान की सड़क से लेकर संसद तक चर्चा हो रही है और पाकिस्तान इन बयानों के जरिये अपने गुनाहों पर पर्दा डालने मे कामयाब हो रहा है. एक तरह से देखा जाये तो मोदी सरकार पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित जिस आतंकवाद का पहली बार मुंह तोड जबाब देने का काम कर रही है, उसमें देश का विपक्ष एकजुट होकर रोड़े अटकाता नज़र आ रहा है. ऐसे बयान दिये जा रहे हैं, जिनसे मोदी सरकार को नुकसान भले ही ना हो, पाकिस्तान को फायदा जरूर मिल रहा है.

विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह है कि मोदी सरकार पुलवामा हमले का “राजनीतिकरण” करके युद्ध जैसा माहौल देश में बनाकर चुनावों में उसका फायदा उठाने की कोशिश कर रही है. लेकिन देश की जनता यह देख रही है कि विपक्ष के इस आरोप में कोई दम नही है और यह पूरी तरह से बेबुनियाद है. गौरतलब बात यह है कि पुलवामा हमले के बाद जब तक मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंज़ाम नही दिया, तब तक तो सभी विपक्षी दलों के नेता मोदी पर यह तंज़ कसते रहे कि 56 इंच के सीने का क्या हुआ और जैसे ही मोदी सरकार ने अपने 56 इंच का सीना दिखाते हुए सर्जिकल स्ट्राइक करके पाकिस्तान की सेना और नागरिकों को बिना कोई नुकसान पहुँचाये उसके बड़े आतंकी संगठन को नष्ट कर दिया तो विपक्ष अपनी झेंप मिटाने के लिये “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” की तर्ज़ पर उल्टा मोदी सरकार पर ही यह आरोप लगाने लगा कि वह इस मामले पर राजनीति कर रही है.

अपनी आदत से मजबूर पाकिस्तान ने आतंकवादी ठिकाने पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने के लिये भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुये हमला करने की नाकाम कोशिश भी की जिसका हमारी सेना ने बहुत बहादुरी के साथ जबाब दिया और एक आउटडेटेड लड़ाकू विमान मिग-21 से पाकिस्तान के आधुनिक लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराया. पाकिस्तान सारी दुनिया के सामने यह नौटंकी करता है कि वह खुद आतंकवाद से पीड़ित है और उससे लड़ने की भरसक कोशिश कर रहा है. अगर यह बात ठीक होती तब तो उसे भारत का धन्यवाद करना चाहिये था क्योंकि भारत ने एक ऐसे आतंकी संगठन का जड से सफाया कर दिया था, जिसे शायद पाकिस्तान खत्म नही कर पा रहा था लेकिन यह अब पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान और आतंकवाद एक की सिक्के के दो पहलू हैं. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान अपने बचाव में जो कुछ भी कह सकता था, उसे कहने की जरूरत ही नही पड़ी क्योंकि भारत के विपक्षी दलों के नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिये जिस तरह के घटिया बयान दिये, उनसे बढिया बहाने और बयान तो खुद पाकिस्तान भी नही दे सकता था. लिहाज़ा पाकिस्तान ने उन्ही बयानों को अपने देश में सड़क से लेकर संसद तक फैला दिया है. पाकिस्तान की संसद में खडे होकर वहां के नेता यह बयान दे रहे हैं कि- “पाकिस्तान को पिछले 70 सालों मे इतना नुकसान किसी भारतीय नेता ने नही पहुँचाया है जितना नुकसान मोदी ने पिछले 5 सालों में पहुँचा दिया है.”

मिग-21 के पाइलट अभिनन्दन की पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ़्तारी और रिहाई दोनों में ही विपक्ष एक बार फिर मोदी सरकार का विरोध करते करते पाकिस्तान का समर्थन करता रंगे हाथों पकड़ा गया. जब तक अभिनन्दन की रिहाई नही हुई तब तक विपक्ष मोदी सरकार को यह कहकर कोसता रहा कि ना मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक की वजह से ही अभिनन्दन पाकिस्तान के चंगुल में फंसा है और मोदी सरकार जान बूझकर युद्ध का माहौल बना रही है. जबकि यह सबको मालूम है कि युद्ध का माहौल पाकिस्तान बना रहा है क्योंकि उसने भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया था. अभिनन्दन की गिरफ़्तारी पर मोदी सरकार को कोसने वाले विपक्षी नेता, उसकी रिहाई पर उसका क्रेडिट “मोदी सरकार” को नही, “पाकिस्तान सरकार” को दे रहे हैं.

क्या विपक्षी दलों के नेता इस देश की जनता को इतना बेबकूफ समझते हैं कि वे एक के बाद एक देश-विरोधी बयान देते जायेंगे और इस देश की जनता इनके इन बयानों से खुश होकर इन्हे लोकसभा चुनावों में वोट दे देगी? देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है कि पाकिस्तान ने किसी युद्धबंदी को सही-सलामत 24 घंटों के अंदर वापस भेजा है- विपक्षी दलों के नेता जितनी मर्ज़ी राजनीति कर लें, लेकिन भारत ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ जो निर्णायक लड़ाई शुरु की है, वह अभी जल्दी खत्म नही होने वाली है- यह लड़ाई भारत और पाकिस्तान दोनो के हित में हैं क्योंकि जिस तरह का आतंकवाद पाकिस्तान फैला रहा है उसे ना भारत की जनता चाहती है और ना पाकिस्तान की. लेख लम्बा हो गया है इसलिये मैं अपनी शब्दों की इस यात्रा को महशर बदायूनीं की इन पंक्तियों के साथ विराम देना चाहता हूँ:

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फैसला
जिस दिये में जान होगी वो दिया रह जायेगा

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