Tuesday, September 22, 2020
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राहुल गांधी जी, बधाई हो, ‘पप्पू’ अब एक धूर्त राजनेता बन गया है!

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प्रिय चिरयुवा नेता श्री राहुल गांधी, अध्यक्ष – कांग्रेस पार्टी,

सबसे पहले आप का अभिनंदन! २००९  से २०१७ तक लगातार launch होने के बाद आख़िरकार आप एक पेशेवर राजनेता बन गए. वैसे तो राजनितिक परिपक्वता से आप अभी भी कोसो दूर हैं, पर पिछले कुछ महीनों में आप का मोदी सरकार को घेरने का प्रयास सराहनीय है. इसका श्रेय कितना आप को जाना चाहिए और कितना Cambridge Analytica को यह मैं नहीं जानता, पर यह ज़रूर कहूंगा की ‘पप्पू’ अब एक धूर्त राजनेता बन गया है.

जब से आप ने कांग्रेस की कमान संभाली है, पार्टी की राजनीती का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. चुनावों से पहले लोगों को आपस में लड़वाना आप के लिए आम बात हो गई है. गुजरात में आप ने पटेलों को बाकी हिन्दुओं से लड़वाया, कर्नाटक में लिंगायत समाज को अलग धर्म का दर्जा देकर आप ने फिर ‘तोड़ो और राज करो’ का परिचय दिया. आप को शायद लगा कि इससे बात न बने, तो आप ने दक्षिण भारतीयों को उत्तर भारतीयों के विरुद्ध उकसाया.

२००८ में आप ने एक किसान की विधवा कलावती की दुर्दशा संसद में व्यतीत की. पर वाह वाही बटोरने के बाद आप कलावती को भूल गए. अंग्रेजी में इसे “use and throw” कहते हैं. फिर उसके बाद भट्टा-परसौल का झूठ हो या गोरखपुर त्रासदी, लाशों पर राजनितिक रोटियां सेंकना आपका सहज स्वभाव हो गया. “Tragedy tourism” में आपने महारत हासिल कर ली.

पर जज लोया मामले में आप की राजनीती का सब से घिनौना चेहरा सामने लाया है. एक झूठी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आप पिछले तीन महीने से जज लोया की मौत पर लगातार सवाल उठा रहे हैं. लोया के परिवार और उनके वकील द्वारा उस रिपोर्ट को ख़ारिज करने के बावजूद आपके रिश्तेदार (तहसीन पूनावाला) और ecosystem के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में जज लोया के मौत की जांच करवाने के लिए याचिका दाखिल की.

तथ्यों को परखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ वह याचिका ख़ारिज की, बल्कि कोर्ट ने अपने निर्णय में याचिकाकर्ताओं के परोक्ष राजनितिक उद्देश्य को बेनकाब भी किया. अच्छा होता अगर इसके बाद आप यह मुद्दा छोड़ देते. पर राजनितिक स्वार्थ के लिए आप ने अब न्यायपालिका पर हमला बोल दिया है. भारत के मुख्य न्यायधीश के खिलाफ आप की पार्टी ने महाभियोग (impeachment) का नोटिस दे कर यह साबित कर दिया है की आप अपनी दादी की तरह सत्ता की चाह में किसी भी संवैधानिक संस्था की बलि देने में सक्षम हैं.

 

भारत की राजनीती में Emergency के बाद शायद यह सबसे निचला स्तर होगा. पर मैं यह भी जनता हूँ की जैसे जैसे २०१९ का चुनाव पास आएगा, आपका dirty tricks department और ज़्यादा सक्रिय होगा.

अंत में मैं सिर्फ इतना कहूंगा की देश की जनता सब देख रही है. इसी जनता ने १९७७ में आप की दादी को और २०१४ में आप की माँ को सबक सिखाया था. अपनी इस घिनौनी राजनीती से बाज आइए, वरना २०१९ का सबक २०१४ से भी कड़वा होगा.

– एक आम नागरिक

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